दौसा के मुर्शिद नगर लालसोट बाईपास स्थित दरगाह हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह के 43वें उर्स में जायरीनों की भीड़ उमड़ी। मीलाद शरीफ, सूफियाना कव्वाली, चादरपोशी और लंगर का आयोजन हुआ। आज सुबह 11 बजे कुल की रस्म होगी।
दौसा (अजीमुद्दीन) सूफी परंपरा में प्रेम, भाईचारे और अमन का संदेश लेकर हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह का 43वां सालाना उर्स मनाया जा रहा है। शहर के मुर्शिद नगर, लालसोट बाईपास स्थित दरगाह परिसर में उर्स के दूसरे दिन जायरीनों की आवाजाही बनी रही। मजार शरीफ पर चादर और फूल पेश कर लोगों ने मुल्क की तरक्की और शांति के लिए दुआ मांगी।
रात्रि में आयोजित मीलाद शरीफ में सूफीवाद के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इसमें बताया गया कि सूफी परंपरा का उद्देश्य समाज में शांति कायम करना और लोगों के बीच प्रेम, सद्भाव व भाईचारे को बढ़ावा देना है। सूफी सभी लोगों के विचार सुनने और आपसी सौहार्द के साथ रहने का संदेश देते हैं। कार्यक्रम में दुनिया में सूफी परंपरा की अहमियत पर भी चर्चा की गई।
चादर और फूल पेश कर मांगी अमन-चैन की दुआ
उर्स में दरगाह पर पहुंचने वाले जायरीनों ने मजार शरीफ पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश किए। दरगाह के खादिमों की ओर से जायरीनों को तबर्रुक के रूप में शीरीनी और मिठाइयां वितरित की गईं। वहीं, लंगरखाने में हजारों लोगों ने पंक्ति में बैठकर सामूहिक रूप से भोजन किया। उर्स के साथ मेले का आयोजन भी किया गया। मेले में झूले, चकरी, खिलौनों और चाट-पकौड़ी की दुकानों पर लोगों की आवाजाही रही। रात को हुई कव्वाली में कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर प्रेम और सूफी विचारधारा का संदेश दिया। महफिल की सरपरस्ती हजरत सूफी इकबाल अहमद शाह मुजफ्फरी ने की।
सुबह 11 बजे होगी कुल की रस्म
उर्स के कार्यक्रमों के तहत सूफी डॉ. अब्दुल लतीफ शाह उर्फ अन्ना मियां ने बताया कि कुल की फातिया की रस्म गुरुवार सुबह 11 बजे अदा की जाएगी।
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