राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों के 468 तबादला मामलों में आदेशों की क्रियान्विति पर रोक लगाई है। 15 दिन में अभ्यावेदन और तबादला नीति के लिए कमेटी बनेगी।
जयपुर। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों के तबादलों को लेकर हाईकोर्ट के एक फैसले ने फिलहाल सरकार के तबादला आदेशों की रफ्तार थाम दी है। 468 अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने संबंधित तबादलों की क्रियान्विति पर रोक लगा दी है। यानी इन आदेशों के आधार पर फिलहाल कर्मचारियों को नई जगह कार्यभार संभालने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।
कोर्ट ने प्रभावित कर्मचारियों को अपनी बात विभाग के सामने रखने का मौका भी दिया है। इसके लिए 15 दिन की समय सीमा तय की गई है। विभागों को इस अवधि में प्राप्त अभ्यावेदनों पर फैसला करना होगा। तब तक तबादला आदेशों पर लगी रोक प्रभावी रहेगी।
एक साथ 468 मामले पहुंचे तो कोर्ट ने पकड़ी बड़ी खामी
मामलों की सुनवाई के दौरान यह मुद्दा सामने आया कि राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों के लिए कोई स्पष्ट और व्यापक नीति नहीं होने के कारण तबादला आदेश लगातार न्यायिक चुनौती का सामना कर रहे हैं।
अलग-अलग कर्मचारियों की ओर से अपने तबादलों के खिलाफ अलग-अलग आधारों पर याचिकाएं दाखिल की गईं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले अदालत पहुंचने के बाद हाईकोर्ट ने सिर्फ इन याचिकाओं तक सीमित रहने के बजाय पूरे तबादला तंत्र के लिए नीति तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया।
पूर्व जज की अगुवाई में बनेगी तबादला नीति
जस्टिस समीर जैन ने इस मामले में पूर्व हाईकोर्ट जज आलोक शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। कमेटी में राज्य के महाधिवक्ता और मुख्य सचिव को भी शामिल किया गया है।
अदालत ने कमेटी को दो महीने के भीतर तबादला नीति का फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा है। इसके बाद राज्य में तबादलों को लेकर नियम और प्रक्रिया तय करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।
कर्मचारियों के लिए अभी क्या राहत?
फैसले का तत्काल असर 468 याचिकाओं से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों पर पड़ेगा। उन्हें अपने संबंधित विभाग में 15 दिन के भीतर अभ्यावेदन देना होगा। विभाग उस पर निर्णय लेगा।
इस दौरान संबंधित तबादला आदेशों की क्रियान्विति रुकी रहेगी। यानी कर्मचारियों को फिलहाल कोर्ट की ओर से एक अंतरिम राहत मिल गई है, जबकि दूसरी तरफ सरकार के लिए एक स्पष्ट तबादला नीति तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
अलग-अलग आधारों पर दी गई थी तबादलों को चुनौती
याचिकाओं में विभिन्न तबादला आदेशों को अलग-अलग आधारों पर चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रामप्रताप सैनी, अशोक बसल, हरेन्द्र नील और गिरिराज राजोरिया सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट के इस आदेश से अब सिर्फ 468 मामलों का तत्काल निस्तारण ही नहीं होगा, बल्कि राज्य में भविष्य के तबादलों को लेकर एक तय और पारदर्शी व्यवस्था बनाने का रास्ता भी खुला है।
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