अब सिर्फ चिप नहीं, चिप बनाने वाले भी यहीं तैयार होंगे | IIT गांधीनगर का ‘समर्थ’ सेंटर बदलेगा भारत के सेमीकंडक्टर मिशन की तस्वीर

आईआईटी गांधीनगर में 190 करोड़ रुपये की लागत से ‘समर्थ’ सेमीकंडक्टर रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब स्थापित होगा। यहां अगले पांच वर्षों में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों, इंजीनियरों और प्रोफेशनल्स को उद्योग आधारित आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा।

नई हवा, डेस्क। आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ तेल या सोना नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर चिप है। मोबाइल से लेकर मिसाइल, कार से लेकर कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, हर तकनीक की धड़कन इसी छोटी-सी चिप में बसती है। भारत अब केवल चिप खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि उसे बनाने और उसके लिए विशेषज्ञ तैयार करने वाला वैश्विक केंद्र बनने की तैयारी में है। इसी दिशा में गुजरात से एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर में जल्द ही सिलिकॉन एंड एडवांस्ड सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च एंड ट्रेनिंग हब (SAMARTH) शुरू होगा। यह ऐसा केंद्र होगा, जहां केवल किताबों की पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों, इंजीनियरों, प्रोफेसरों और उद्योगों में काम कर रहे प्रोफेशनल्स को वही तकनीक और अनुभव मिलेगा, जिसकी मांग तेजी से बढ़ रहे सेमीकंडक्टर उद्योग में है।

190 करोड़ का दांव, लक्ष्य—भारत को चिप टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाना

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा आईआईटी गांधीनगर ने मिलकर 190 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। केंद्र की स्थापना के लिए मशीनों की खरीद, अत्याधुनिक लैब और भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। तैयारियां पूरी होते ही यहां प्रशिक्षण शुरू कर दिया जाएगा।

क्लासरूम नहीं, सीधे फैक्ट्री के लिए होगी तैयारी

‘समर्थ’ की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां विद्यार्थियों को केवल डिग्री नहीं, बल्कि ‘फैब-रेडी’ बनाया जाएगा। यानी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे सीधे सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों में काम करने के लिए तैयार होंगे। इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थी, प्रोफेसर और उद्योगों में पहले से कार्यरत विशेषज्ञ यहां आकर नई तकनीकों पर अपने कौशल को निखार सकेंगे।

इंडस्ट्री और कॉलेज के बीच बनेगा मजबूत पुल

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अनुसंधान, उद्योग और शिक्षा को एक मंच पर लाने के लिए ‘समर्थ’ को विकसित किया जा रहा है। आईआईटी गांधीनगर राज्य के विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों के साथ समझौते (एमओयू) की तैयारी में जुटा है, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक यह सुविधा पहुंच सके।

राज्य के विद्यार्थियों के लिए यहां मामूली शुल्क पर प्रशिक्षण उपलब्ध होगा। इसके अलावा स्पेशलाइज्ड शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स, समर स्कूल और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, जिससे स्कूल और कॉलेज स्तर पर ही युवाओं में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के प्रति रुचि विकसित हो सके।

5 साल में तैयार होगी 10 हजार से ज्यादा विशेषज्ञों की नई फौज

‘समर्थ’ के जरिए अगले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • 5,600 अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
  • 1,500 वॉकेशनल और टेक्निकल पाठ्यक्रमों के टेक्नीशियन तैयार किए जाएंगे।
  • 1,000 लोगों को सर्टिफिकेट कोर्स के जरिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • 230 फैकल्टी सदस्यों और 230 इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को अपस्किलिंग प्रशिक्षण मिलेगा।
  • समर स्कूल और वन-डे एक्सपोजर कार्यक्रमों के माध्यम से 2,700 से अधिक विद्यार्थियों को इस क्षेत्र से जोड़ा जाएगा।

यानी पांच वर्षों में 10 हजार से अधिक प्रशिक्षित वर्कफोर्स तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

विश्वस्तरीय लैब में होगी असली चिप टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग

‘समर्थ’ में नैनो फैब्रिकेशन और CMOS प्रोसेस प्रशिक्षण की अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां डिवाइस प्रोसेस कैरेक्टराइजेशन के जरिए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चिप निर्माण प्रक्रिया की टेस्टिंग और गुणवत्ता जांच की जाएगी।

इसके अलावा सेमीकंडक्टर प्रोसेस एवं डिवाइस डिजाइन, डिवाइस मॉडलिंग लैब और आईसी डिजाइन एवं प्रोटोटाइप लैब जैसी अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं भी स्थापित होंगी, जिससे विद्यार्थियों को उद्योग स्तर का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

गुजरात सिर्फ निवेश का नहीं, अब टैलेंट का भी बनेगा सेमीकंडक्टर हब

देश में लगातार लग रहे सेमीकंडक्टर निवेश के बीच सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित मानव संसाधन की मानी जा रही है। ‘समर्थ’ इसी कमी को पूरा करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। यह केंद्र न केवल गुजरात, बल्कि पूरे देश के लिए ऐसे इंजीनियर और विशेषज्ञ तैयार करेगा, जो भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षा को नई रफ्तार दे सकें।

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