दौसा में 40 दिवसीय निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में 450 से अधिक बालक-बालिकाओं को सम्मानित किया गया। उपखण्ड अधिकारी संजू मीना ने कौशल विकास को आत्मनिर्भरता की कुंजी बताया।
दौसा। हुनर जब अवसर से मिलता है तो आत्मविश्वास जन्म लेता है। जिला मुख्यालय स्थित महात्मा गांधी विद्यालय, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड और अनुराग सेवा संस्थान लालसोट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 40 दिवसीय निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण शिविर का समापन पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह के साथ हुआ। समारोह में प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया तो मंच पर बच्चों की रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित दौसा उपखण्ड अधिकारी श्रीमती संजू मीना ने कहा कि प्रत्येक बालक और बालिका में अद्भुत प्रतिभा तथा सृजनात्मक क्षमता छिपी होती है। ऐसे कौशल विकास शिविर बच्चों की अंतर्निहित क्षमताओं को निखारने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सीखा गया कौशल कभी व्यर्थ नहीं जाता, इसलिए निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्काउट गाइड के जिला अध्यक्ष सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि भारत स्काउट गाइड संगठन लंबे समय से युवाओं में सेवा, नेतृत्व और कौशल विकास की भावना को मजबूत करने का कार्य कर रहा है।
अनुराग सेवा संस्थान के संयोजक सियाराम शर्मा ने बताया कि संस्थान की स्थापना के 31 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 31 विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी जिला मुख्यालय पर आयोजित सभी प्रशिक्षण शिविर पूरी तरह निःशुल्क रखे जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बालक-बालिकाएं लाभान्वित हो सकें। संस्था का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक कौशल विकास और संस्कार आधारित शिक्षा पहुंचाना है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सीओ स्काउट प्रदीप सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया तथा शिविर की विस्तृत गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
शिविर संयोजक एवं जिला समन्वयक डॉ. संजीव रावत ने बताया कि जिले में संस्थान द्वारा आयोजित तीन प्रशिक्षण शिविरों में 450 से अधिक बच्चों ने विभिन्न कला एवं कौशल विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए मेडल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान रानी खंडेलवाल और अनन्या के निर्देशन में बच्चों ने राजस्थानी लोकगीत, लोकनृत्य, बॉलीवुड नृत्य तथा शास्त्रीय संगीत पर आधारित प्रस्तुतियां देकर खूब तालियां बटोरीं। प्रतिभागियों द्वारा तैयार सिलाई, ड्राइंग, मेहंदी और क्रोशिया कला के आकर्षक उत्पादों की प्रदर्शनी भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
शिविर प्रभारी कमलकांत शर्मा ने अतिथियों को कचरे के पुनर्चक्रण और पर्यावरण प्रबंधन से तैयार नवाचारों की जानकारी दी तथा प्रदर्शनी का अवलोकन कराया।
इस अवसर पर वरिष्ठ स्काउटर रामावतार शर्मा, प्रधानाचार्य जटाशंकर शर्मा, मुकेश शर्मा, जगन्नाथ बैरवा, महेश बैरवा, दिलीप सांवरिया, दिनेश महावर, विष्णु शर्मा, निशा शर्मा, शिखा, गरिमा शर्मा, शारदा खंडेलवाल, श्याम प्रकाश उपाध्याय, बृजमोहन कानपुरा, अनुराग सेवा संस्थान के दौसा समन्वयक रमाकांत शर्मा, उत्कर्ष नारायण, हीरा लाल महावर सहित अनेक गणमान्यजन मौजूद रहे।
समारोह में प्रधानाचार्य जटाशंकर शर्मा एवं शारीरिक शिक्षक श्याम प्रकाश उपाध्याय का सेवानिवृत्ति उपलक्ष्य में सम्मान किया गया। वहीं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रमेश कुमार सैनी और नेहा बत्रा को ‘पर्यावरण मित्र’ सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सीओ गाइड निरमा मीणा एवं डॉ. संजीव रावत ने किया।
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