‘जरा पढ़ो न यार…’ राज्यपाल ने संघ पर उठते सवालों का दिया मंच से जवाब | जयपुर में डॉ. हेडगेवार पर नाटक ने बांधा समां, गूंजे राष्ट्र, संगठन और संस्कार के स्वर

जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में डॉ. हेडगेवार पर आधारित नाटक का मंचन हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ वागड़े ने संघ और स्वतंत्रता आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया। कार्यक्रम में दिया कुमारी समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।

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जयपुर 

जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में ऐसा माहौल बना, जहां मंच पर सिर्फ एक नाटक नहीं चल रहा था, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक यात्रा, संघर्ष और संगठन की कहानी जीवंत होती नजर आई। ‘युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार, संघ सृजन का नाट्य अविष्कार’ शीर्षक से प्रस्तुत इस नाट्य मंचन ने दर्शकों को इतिहास, राष्ट्रभाव और संगठन की शक्ति से जोड़ दिया।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हरिभाऊ वागड़े ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना की प्रेरक गाथा है। उन्होंने कहा कि बचपन में ही डॉ. हेडगेवार ने अंग्रेज महारानी की बांटी मिठाई लेने से इनकार कर दिया था, क्योंकि ‘वो हमारी महारानी नहीं थी।’

राज्यपाल ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने कांग्रेस में भी काम किया और उसके अधिवेशन में स्पष्ट कहा था कि ‘यही हिन्दू राष्ट्र है।’ संघ पर सवाल उठाने वालों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने मंच से कहा— ‘लोग पूछते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन में संघ ने क्या किया… जरा पढ़ो न यार।’ इस टिप्पणी पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार अंतिम समय में बेहद अस्वस्थ थे, लेकिन 1940 में संघ शिक्षा वर्ग में पहुंचे और स्वयंसेवकों को देखकर कहा— ‘मैं भारत का छोटा रूप देख रहा हूं।’

अपने संबोधन में हरिभाऊ वागड़े ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वाजपेयी ने ‘ऑर्गेनाइजर’ में लिखे लेख में कहा था कि ‘मैं आज जो कुछ हूं, संघ के प्रचारक नारद राव तरके की वजह से हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. हेडगेवार ने ही नानाजी देशमुख को पिलानी में प्रचारक बनने भेजा था।

राज्यपाल ने विवेकानंद स्मारक निर्माण का जिक्र करते हुए बताया कि एक-एक रुपया जोड़कर यह स्मारक खड़ा किया गया। उन्होंने मोरोपंत पिंगले का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों को ऐसा वातावरण बनाने की प्रेरणा दी गई, जिससे विकास का रास्ता मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि संघ का कार्य देश सेवा का विशाल अभियान है और इसे तन्मयता से करने वाले स्वयंसेवकों ने संघर्ष के कठिन दौर भी देखे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रमेश चंद अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य किसी पुण्य नदी के सतत प्रवाह की तरह आगे बढ़ रहा है और उसका विशाल स्वरूप इसी समर्पण का प्रतीक है।

महामंडलेश्वर गणेश दास महाराज ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार दूरदर्शी व्यक्तित्व थे, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत हैं।

विशिष्ट अतिथि दिया कुमारी ने कहा कि यह नाट्य प्रस्तुति राष्ट्रीय चेतना और संगठनात्मक शक्ति का प्रभावशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार व्यक्ति निर्माण को राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार मानते थे। प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम समाज को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में नाद ब्रह्म के प्रचार प्रमुख रवींद्र सहष्राबुद्धे ने आभार व्यक्त किया। नाटक को डॉ. अजय प्रधान ने लिखा, जबकि निर्देशन सुबोध सुरजीकर ने किया। निर्माता पद्मकर धनोरकर रहे और संगीत शैलेश डाणी ने दिया।

नागपुर की नाद ब्रम्ह टीम द्वारा तैयार इस नाटक में 45 स्वयंसेवकों ने भागीदारी निभाई।

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