दादा जी, आरव और अमायरा की प्रेरक लघुकथा ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ बताती है कि शिकायत करने के बजाय स्वयं पहल करने से कैसे एक उजड़ा पार्क हरा-भरा बगीचा बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामूहिक प्रयास का सुंदर संदेश।
दादा जी, आरव और अमायरा की प्रेरक लघुकथा ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ बताती है कि शिकायत करने के बजाय स्वयं पहल करने से कैसे एक उजड़ा पार्क हरा-भरा बगीचा बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामूहिक प्रयास का सुंदर संदेश।