अपना हाथ जगन्नाथ …

दादा जी, आरव और अमायरा की प्रेरक लघुकथा ‘अपना हाथ जगन्नाथ’ बताती है कि शिकायत करने के बजाय स्वयं पहल करने से कैसे एक उजड़ा पार्क हरा-भरा बगीचा बन सकता है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सामूहिक प्रयास का सुंदर संदेश।