जयपुर (Jaipur) में 7-8 मार्च 2026 को स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagran Manch) की राष्ट्रीय परिषद आयोजित होगी, जिसमें वैश्वीकरण, एआई, आर्थिक संप्रभुता और भारतीय विकास मॉडल पर गहन मंथन किया जाएगा।
जयपुर
दुनिया जब युद्ध, व्यापारिक टकराव और आर्थिक अस्थिरता के भंवर में फंसी है, उसी दौर में जयपुर में स्वदेशी की आवाज़ बुलंद होने जा रही है। स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद 7-8 मार्च 2026 को गुलाबी नगरी में जुटेगी, जहां देशभर से आए प्रतिनिधि वैश्वीकरण की चुनौतियों, आर्थिक संप्रभुता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नए विकास मॉडल पर गहन मंथन करेंगे।
पिछले तीन दशक से अधिक समय से आर्थिक साम्राज्यवाद और अंधाधुंध भूमंडलीकरण के खिलाफ आवाज़ उठाने वाला स्वदेशी जागरण मंच एक बार फिर बड़े विमर्श की तैयारी में है। जयपुर में होने वाली राष्ट्रीय परिषद की इस बैठक में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलावों और उनके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा होगी।
स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संयोजक आर. सुन्दरम् और सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के गठन से पहले हुए गैट समझौते भी विकासशील देशों के लिए असमान थे और बाद में बने वैश्विक व्यापार नियमों ने भी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को ज्यादा फायदा पहुंचाया। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने विकासशील देशों पर दबाव बनाकर उनके बाजार अपने उत्पादों और पूंजी के लिए खोलने को मजबूर किया, जबकि अपनी कंपनियों के हित में बौद्धिक संपदा और निवेश से जुड़े नियमों में बदलाव भी करवाए।
मंच के नेताओं के अनुसार अब वही वैश्वीकरण कई देशों के लिए कमजोरी बनता दिखाई दे रहा है। हाल ही में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी स्वीकार किया कि टैरिफ, वित्तीय व्यवस्था और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं जैसे आर्थिक उपकरणों का इस्तेमाल अब दबाव बनाने के हथियार के रूप में किया जा रहा है।
इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जयपुर में होने वाली परिषद में युद्धों और संघर्षों से पैदा हुई आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक टकराव और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही भारत के सामने मौजूद नीति विकल्पों पर भी गंभीर विचार होगा।
बैठक में टैरिफ नीति, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं, सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ मैटेरियल्स की आपूर्ति, भुगतान प्रणालियों और प्रौद्योगिकी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। मंच का मानना है कि ये सभी क्षेत्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा और शक्ति संतुलन के महत्वपूर्ण औजार बन चुके हैं, जिनका असर विकासशील देशों की प्रगति पर भी पड़ रहा है।
राष्ट्रीय परिषद में संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अधिकांश टैरिफ निरस्त करने के फैसले के बाद बने हालातों और उससे जुड़े संभावित विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा।
इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई को लेकर भी व्यापक चर्चा होगी। मंच का कहना है कि यह तकनीक एक ओर रोजगार के लिए चुनौती बन सकती है, वहीं दूसरी ओर इसमें अपार संभावनाएँ भी हैं। परिषद में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि भारत एआई के क्षेत्र में मजबूत शक्ति बने और इसका उपयोग जनकल्याण के लिए किया जाए।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और एआई के लोकतंत्रीकरण पर भी चर्चा प्रस्तावित है, ताकि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच सके।
परिषद में जलवायु परिवर्तन, ग्रामीण क्षेत्रों से महानगरों की ओर बढ़ते पलायन, बढ़ती आर्थिक असमानताओं और गैर-संचारी रोगों जैसी चुनौतियों पर भी विमर्श होगा। मंच का मानना है कि इन समस्याओं की जड़ पश्चिमी औद्योगिक विकास मॉडल में है, जिसे पिछले कुछ दशकों में भारत ने भी अपनाया।
स्वदेशी जागरण मंच का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित विकास मॉडल में निहित है। ऐसा मॉडल जो केवल जीडीपी वृद्धि पर ही केंद्रित न होकर संसाधनों के संतुलित उपयोग, पर्यावरण संरक्षण, विकेंद्रीकरण और समाज के कमजोर वर्गों के हितों को प्राथमिकता देता हो।
जयपुर में होने वाली राष्ट्रीय परिषद में देशभर से आए प्रतिनिधि इन सभी मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे और भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस विचार प्रस्तुत करेंगे।
राष्ट्रीय परिषद में भाग लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों और संगठनों का मंच की ओर से स्वागत किया गया है।
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