रसायन से रुग्ण हो रही धरती, आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी | एमपीयूएटी के 19वें दीक्षांत में राज्यपाल बागडे की सख़्त चेतावनी, 1181 डिग्रियां व 44 स्वर्ण पदक वितरित

उदयपुर (Udaipur) में एमपीयूएटी (MPUAT) के 19वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे (Governor Haribhau Bagde) ने रासायनिक खेती पर चिंता जताई। समारोह में 1181 डिग्रियां, 44 स्वर्ण पदक वितरित किए गए।

उदयपुर। खेती अगर जहर बनती रही, तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी—यह कोई नारा नहीं, बल्कि दीक्षांत मंच से आई सबसे कड़ी चेतावनी थी। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 19वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बेलगाम इस्तेमाल को सीधे कैंसर जैसी घातक बीमारियों से जोड़ते हुए कहा कि आज का उत्पादन मॉडल धरती और इंसान—दोनों को बीमार कर रहा है। रवीन्द्र नाथ मेडिकल कॉलेज सभागार में हुए समारोह में जहां 1181 विद्यार्थियों ने डिग्रियां और 44 ने स्वर्ण पदक थामे, वहीं मंच से भविष्य की खेती को लेकर गंभीर आत्ममंथन की आवाज भी उठी।

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राज्यपाल बागडे ने कहा कि 1980 तक भारत अनाज आयात करता था, लेकिन आज 140 करोड़ की आबादी के बावजूद देश न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि अतिरिक्त भंडार भी उपलब्ध है। उन्होंने उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि अगले 50 से 100 वर्षों की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए उत्पादन लगातार बढ़ाना होगा। उन्होंने जैविक खेती, उच्च प्रोटीन युक्त फसल किस्मों और देसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान दूध उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है, फिर भी गोधन का यांत्रिक उपयोग बढ़ रहा है। देसी गाय का दूध अधिक गुणकारी है और इसकी नस्लों के संरक्षण की आवश्यकता है। दीक्षांत समारोह को उन्होंने शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि विद्यार्थी जीवन का नवआरंभ बताया। 44 स्वर्ण पदकों में से 27 पदक छात्राओं को मिलना उनकी प्रतिभा और सामर्थ्य का प्रमाण है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से अपेक्षा जताई कि कृषि क्षेत्र में मौलिक अनुसंधान को गति देते हुए विशिष्ट फसलों के पेटेंट हासिल किए जाएं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अब तक 8 पेटेंट, 57 उन्नत कृषि तकनीकें और 5 उन्नत फसल किस्में विकसित की हैं। साथ ही प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रारंभ राष्ट्रीय खाद्य तेल–तिलहन मिशन को सफल बनाने में कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका को निर्णायक बताया।

कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि ‘जय जवान–जय किसान’ का सपना तब साकार होगा, जब कृषि छात्र किसानों को खुशहाल बनाने की दिशा में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि बीते 10 वर्षों में देश का खाद्यान्न उत्पादन 251.54 मिलियन टन से बढ़कर 357.73 मिलियन टन तक पहुंचना कृषि क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने छात्रों को नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का आह्वान किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविन्द वर्मा ने विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में 5 नए पेटेंट व डिजाइन पंजीकरण अर्जित किए गए हैं। विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिक डॉ. एन.एल. पंवार और डॉ. विनोद सहारण विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हुए हैं।

छात्राओं का दबदबा, मुस्कान व वत्सला को शीर्ष स्वर्ण पदक
समारोह में कुलाधिपति स्वर्ण पदक विज्ञान निष्णात (सामुदायिक विज्ञान) खाद्य एवं पोषण मुस्कान को तथा कुलगुरु स्वर्ण पदक विज्ञान स्नातक (ऑनर्स) कृषि वत्सला वशिष्ठ को प्रदान किया गया। कुल 44 स्वर्ण पदकों में 27 छात्राओं और 17 छात्रों को सम्मानित किया गया।

पांच उन्नत किस्मों का लोकार्पण
राज्यपाल ने प्रताप मूंगफली-4, प्रताप संकर मक्का-6, प्रताप ज्वार-2510, प्रताप ईसबगोल-1 एवं प्रताप असालिया-1 किस्मों का लोकार्पण किया।

विश्व की दो-तिहाई आबादी को भोजन दे सकता है भारत
दीक्षांत अतिथि प्रो. भगवती प्रसाद शर्मा ने कहा कि यदि जल संसाधनों का समुचित उपयोग और मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादों पर जोर दिया जाए, तो भारत विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकता है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण और बहुविविध पौध प्रजातियों के संरक्षण को पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अनिवार्य बताया।

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