झालावाड़
राजस्थान के झालावाड़ जिले में शुक्रवार को जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। मनोहरथाना ब्लॉक के पीपलोदी गांव में स्थित एक सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत की छत बारिश के दौरान अचानक गिर गई। उस मलबे में 7वीं कक्षा के मासूम बच्चे दब गए। देखते ही देखते, पढ़ाई की जगह चीख-पुकार में बदल गई — 7 बच्चों की मौके पर ही जान चली गई, जबकि 26 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित कई बड़े नेताओं ने हादसे पर गहरा दुख जताया है।
बारिश के बीच जैसे ही स्कूल की दीवार चरमराई, क्लास में पढ़ते 35 से ज्यादा बच्चे कुछ समझ पाते, उससे पहले ही छत भरभराकर गिर पड़ी। बच्चों की चीखें सुनकर दौड़े स्थानीय ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ ने बिना देर किए मलबे को हटाना शुरू किया। कुछ बच्चे मलबे के नीचे दबकर तड़प रहे थे, कुछ की सांसें पहले ही थम चुकी थीं।
गांव में पसरा मातम, हर घर में रोशनी बुझी
मृतकों में पायल (14), प्रियंका (14), कार्तिक (8), हरीश (8), कान्हा, सतीश, कुंदन (12) शामिल है। घायलों में कुंदन, मिनी, वीरम, मिथुन, आरती, विशाल, अनुराधा, राजू और शाहीना जैसे कई बच्चों को गंभीर हालत में झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
डॉक्टरों की आंखें भी नम
मनोहरथाना अस्पताल में हालात बेहद दर्दनाक थे। डॉ. कौशल लोढ़ा ने बताया कि 35 घायल बच्चों को अस्पताल लाया गया, जिनमें से 5 की पहले ही मौत हो चुकी थी। 11 गंभीर घायलों को झालावाड़ रेफर किया गया, जहां तीन और बच्चों ने दम तोड़ दिया।
इधऱ, शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल की हेडमास्टर मीना गर्ग और शिक्षकों जावेद अहमद, रामविलास लववंशी, कन्हैयालाल सुमन और बद्रीलाल लोधा को निलंबित कर दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल की इमारत कई साल से जर्जर हालत में थी। कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन मरम्मत की जगह टालमटोल होता रहा। हादसे के वक्त स्कूल में मौजूद दो शिक्षक सुरक्षित हैं, क्योंकि वे क्लास के बाहर थे।
सरकारी लापरवाही या सिस्टम की हत्या?
यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक जिंदा सवाल है — आखिर कब तक मासूम बच्चे सरकारी लापरवाही के मलबे में दफन होते रहेंगे?
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