उदयपुर (Udaipur) के MPUAT में अर्पण सेवा संस्थान और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हुआ। 7 राज्यों से 300 प्रतिभागियों ने भाग लिया और 21 कर्मयोगियों को सम्मानित किया गया।
उदयपुर
नवाचार, सहयोग और ग्रामीण भारत के भविष्य को नई दिशा देने के संकल्प के साथ महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) के RCA सभागार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन हुआ। अर्पण सेवा संस्थान, UNICEF और MPUAT के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों, CSR प्रतिनिधियों, किसानों और संस्थागत नेताओं ने भाग लेकर ग्रामीण सतत विकास का नया खाका तैयार किया।
सम्मेलन का विषय था—‘नवाचार विनिमय एवं ग्रामीण सतत विकास के लिए सहयोगात्मक कार्य’, जिसने तीन दिनों तक विचारों, अनुभवों और भविष्य की रणनीतियों का जीवंत मंच तैयार किया।
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FPO से लेकर कार्बन क्रेडिट तक… हर मुद्दे पर हुआ मंथन
समापन दिवस का प्रमुख सत्र किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की स्थिरता और उद्यमशीलता विकास पर केंद्रित रहा। Ayecart के शुभेंदु दास ने FPO को आत्मनिर्भर और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए, जिसने प्रतिभागियों को नई दिशा दी।
ऑनलाइन माध्यम से देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
- HDFC परिवर्तन की उपाध्यक्ष रुपाली गोस्वामी ने ग्रामीण विकास में CSR की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।
- L&T की CSR प्रमुख मेबल अब्राहम ने संस्थागत सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया।
- NABARD जयपुर के DGM राजीव कुमार बरनवाल ने कृषि वित्तपोषण के नए अवसरों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
- Hasten Regeneration Pvt Ltd की शीबा सेन ने कार्बन क्रेडिट की संभावनाओं पर व्यावहारिक अनुभव साझा किए।
‘किसानों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना ही असली बदलाव’
RCA कॉलेज के डीन डॉ. मनोज महेला ने किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि उनकी आय और अवसर दोनों बढ़ सकें। वहीं CSR सलाहकार नीरज प्रसाद ने परियोजना डिजाइन और जमीनी स्तर के प्रबंधन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र संचालित किया।
30 साल की यात्रा का जश्न, भविष्य के लिए नया संकल्प
मुख्य अतिथि डॉ. एन.एस. राठौर, पूर्व कुलपति, ने व्यवसाय विश्लेषण, उद्यम विकास, जनरेटिव AI और समावेशी नवाचार जैसे भविष्योन्मुखी विषयों पर संस्था की दिशा तय करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. पी.के. सिंह ने जलवायु परिवर्तन और प्रतिस्पर्धा के इस दौर में ज्ञान को लगातार अपडेट रखने की जरूरत पर जोर दिया।
अर्पण सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शुभ करण सिंह ने बताया कि सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श के आधार पर आने वाले समय में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
21 कर्मयोगी सम्मानित, 7 राज्यों से 300 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह रहा, जब संस्थान में 15 वर्षों से अधिक समय से उत्कृष्ट कार्य कर रहे 21 कर्मयोगियों को ‘कमिटमेंट और एक्सीलेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 7 राज्यों से आए 250 कर्मयोगियों और 50 से अधिक किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। तीन दिनों तक चले इस ऊर्जावान आयोजन का समापन महासचिव याशंकर शिवहरे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
यह सम्मेलन न केवल अर्पण सेवा संस्थान की 30 वर्षीय यात्रा का उत्सव बना, बल्कि सतत विकास लक्ष्यों और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी साबित हुआ।
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