मजदूरों के बैंक खाते, दुबई का नेटवर्क और 24 करोड़ का खेल, जयपुर में पकड़ा गया साइबर फ्रॉड का मास्टरमाइंड, ऐसे सफेद करता था ठगी की कमाई

जयपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड और क्रिप्टो-हवाला सिंडिकेट का खुलासा किया है। मास्टरमाइंड विकास ढाका मजदूरों के फर्जी खातों से 24 करोड़ को व्हाइट कर चुका है।

जयपुर: जयपुर में बैठकर देशभर की साइबर ठगी की रकम को सफेद करने का खेल! गरीब मजदूरों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, उन खातों में ठगी और ऑनलाइन सट्टे की रकम पहुंचाई और फिर क्रिप्टो करेंसी के रास्ते दुबई के हवाला नेटवर्क तक पहुंचने का इंतजाम किया। जयपुर पुलिस ने शुक्रवार को ऐसे ही एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का खुलासा करते हुए 30 वर्षीय विकास ढाका को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले दो साल में साइबर ठगी से जुटाए गए करीब 24 करोड़ रुपये को सफेद करने के नेटवर्क से जुड़ा रहा है।

सीकर जिले के बासनी बराला निवासी विकास ढाका को वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, वह करीब 20 दिन पहले नेटवर्क का विस्तार करने के लिए जयपुर आया था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से 9 मोबाइल फोन, 8 फिनो पेमेंट डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए हैं।

गरीब मजदूरों के नाम पर खाते, अंदर जमा होती थी ठगी की रकम

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर जैसलमेर और सीकर के आसपास के इलाकों में रिसॉर्ट्स और रेस्टोरेंट में काम करने वाले गरीब एवं सीधे-साधे मजदूरों को पैसों का लालच देता था। उनके पहचान पत्रों यानी KYC दस्तावेजों का इस्तेमाल कर निजी बैंकों और पेमेंट्स बैंकों में चालू तथा बचत खाते खुलवाए जाते थे।

इसके साथ ही एयरटेल पेमेंट्स बैंक के मर्चेंट QR कोड भी तैयार करवाए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, इन खातों और क्यूआर कोड का इस्तेमाल साइबर ठगी, ऑनलाइन गैंबलिंग और सट्टे से जुड़ी रकम को जमा करने के लिए किया जाता था।

आरोप है कि इन खातों को देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों और अवैध ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों को भारी कमीशन पर उपलब्ध कराया जाता था। इस तरह मजदूरों के नाम पर खुले खाते कथित तौर पर अपराध की रकम को इधर-उधर करने का जरिया बन गए।

क्रिप्टो से दुबई तक पहुंचता था पैसा, फिर सफेद करने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, ठगी से प्राप्त रकम खातों में आने के बाद विकास उसे क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था। इसके बाद दुबई स्थित हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए रकम को लिक्विडेट कर कथित तौर पर सफेद किया जाता था और वापस भारतीय बाजार में खपाया जाता था। जांच में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 24 करोड़ रुपये की रकम को सफेद करने की बात सामने आई है। पुलिस अब इस रकम से जुड़े लेनदेन, क्रिप्टो नेटवर्क और हवाला कनेक्शन की पड़ताल कर रही है।

27 अक्टूबर को मिली सूचना, फिर फ्लैट पर पहुंची पुलिस

डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण के मुताबिक, 27 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में विकास ढाका अपने साथियों के साथ मिलकर USDT और क्रिप्टो करेंसी के जरिए साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क चला रहा है।

सूचना के आधार पर एडिशनल डीसीपी राजेश गुप्ता और प्रोबेशनर आईपीएस अदिति उपाध्याय के सुपरविजन में टीम गठित की गई। वैशाली नगर थानाधिकारी अरविन्द सिंह और डीएसटी प्रभारी गणेश सैनी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने फ्लैट पर दबिश देकर विकास ढाका को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को साइबर क्राइम से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया है। पूछताछ में उसके हवाला, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी के कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

9 मोबाइल से खुल सकते हैं नेटवर्क के नए राज

पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद 9 मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खाते खुलवाने से लेकर क्रिप्टो करेंसी और हवाला के जरिए रकम को ठिकाने लगाने तक नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। पुलिस की नजर अब कथित एजेंटों, हवाला कारोबारियों और विदेश में मौजूद संपर्कों पर भी है। मोबाइल फोन से मिलने वाली जानकारी से नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और लेनदेन की कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।

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