उदयपुर के सांसद स्वदेशी मेला 2026 में MPUAT के मशरूम स्टॉल पर किसानों और युवाओं की रुचि देखने को मिल रही है। बाबूलाल खराड़ी, डॉ. मन्नालाल रावत और फूलसिंह मीणा ने स्टॉल का अवलोकन किया।
उदयपुर। खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का रास्ता तलाश रहे किसानों और युवाओं के लिए मशरूम उत्पादन तकनीक इन दिनों उदयपुर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। राजस्थान कृषि महाविद्यालय के खेल मैदान में चल रहे ‘सांसद स्वदेशी मेला 2026’ में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) की ओर से लगाए गए संयुक्त प्रदर्शनी स्टॉल पर मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक को लेकर किसानों और युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
2 से 5 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हो रहे इस मेले में विश्वविद्यालय के स्टॉल पर आगंतुकों को मशरूम उत्पादन की आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही, उन्हें विश्वविद्यालय की मशरूम प्रयोगशाला में व्यावहारिक प्रशिक्षण लेकर एग्री-एंटरप्रेन्योरशिप यानी कृषि उद्यमिता से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार पर जोर
विश्वविद्यालय की मशरूम परियोजना के प्रभारी डॉ. नारायण लाल मीणा ने बताया कि स्टॉल के जरिए किसानों, युवाओं और अन्य आगंतुकों को मशरूम उत्पादन की तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। विश्वविद्यालय का जोर इस बात पर है कि किसान और युवा मशरूम उत्पादन जैसी तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार स्थापित करें और अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ें। मेले में आने वाले लोग भी इस तकनीक में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
मंत्री, सांसद और विधायक ने देखा विश्वविद्यालय का स्टॉल
प्रदर्शनी के दौरान राजस्थान सरकार के जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने MPUAT के स्टॉल का अवलोकन किया। जनप्रतिनिधियों ने स्टॉल पर प्रदर्शित मशरूम उत्पादन तकनीक की जानकारी ली और विश्वविद्यालय की ओर से किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने विशेष रूप से जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के किसानों तक मशरूम उत्पादन की तकनीक पहुंचाने और उन्हें इससे जोड़ने पर जोर दिया।
किसानों और युवाओं को तकनीक से जोड़ना लक्ष्य
MPUAT के कुलगुरु (कुलपति) डॉ. प्रताप सिंह के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से विश्वविद्यालय की ओर से किसानों के कल्याण और तकनीकी प्रसार से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मेले में लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों और युवाओं को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों और युवाओं को ऐसी तकनीकों से परिचित कराना है, जिन्हें अपनाकर वे कृषि के साथ उद्यमिता और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।
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