राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने वर्ष 2026 की डीजीपी डिस्क और प्रशस्ति रोल सूची जारी कर दी है। 123 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। हरिशंकर, सुमित मेहरड़ा, अमित बुढ़ानिया, जय यादव और विकास सांगवान चर्चा में हैं।
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जयपुर
राजस्थान पुलिस मुख्यालय से शनिवार को ऐसी सूची निकली, जिसका इंतजार पूरे साल पुलिस महकमे में रहता है। यह सिर्फ सम्मान पाने वालों की सूची नहीं, बल्कि उन अफसरों और जवानों का रिपोर्ट कार्ड है जिन्होंने अपराधियों की नींद उड़ाई, साइबर ठगों पर शिकंजा कसा, कानून-व्यवस्था संभाली और पुलिसिंग में नए प्रयोग किए।
वर्ष 2026 के लिए जारी डीजीपी डिस्क और प्रशस्ति रोल में आईपीएस, आरपीएस, निरीक्षक, उपनिरीक्षक, एएसआई, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर तक कुल 123 अधिकारियों-कर्मचारियों का चयन किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने उन नामों पर मुहर लगाई है, जिनके काम ने बीते वर्ष विभाग के भीतर अलग पहचान बनाई। पहली बार किसी अभियोजन अधिकारी को डीजीपी डिस्क मिला है।
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक हरिशंकर के नाम की है। सीमावर्ती जिले में अपराध नियंत्रण, नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई और प्रशासनिक दक्षता के कारण उन्हें पहली बार डीजीपी डिस्क से सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले हनुमानगढ़ में एसपी रहते हुए भी उनके काम की काफी सराहना हुई थी।
साइबर अपराध के मोर्चे पर सक्रिय आईपीएस अधिकारी सुमित मेहरड़ा भी पहली बार डीजीपी डिस्क पाने वालों में शामिल हैं। जयपुर में डीसीपी ट्रैफिक रहते हुए उन्होंने यातायात प्रबंधन में कई नवाचार किए और फील्ड में लगातार मौजूद रहकर व्यवस्था सुधारने की कोशिश की। वर्तमान में वे साइबर क्राइम शाखा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार बुढ़ानिया को दूसरी बार डीजीपी डिस्क से नवाजा जाएगा। उनके नेतृत्व में रोडवेज टिकट चोरी गिरोह, सूदखोरी नेटवर्क और बिजली चोरी माफियाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई ने राज्य ही नहीं, देशभर में ध्यान खींचा। कई अभियानों को अन्य राज्यों ने भी अध्ययन के तौर पर देखा।
इस सूची में एक नाम ऐसा भी है जिसने तीसरी बार यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया है। जय यादव को लगातार तीसरी बार डीजीपी डिस्क प्रदान की जाएगी। चूरू में एसपी रहते हुए उन्होंने अपराधियों की निगरानी और गिरफ्तारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग किया था। संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ उनकी रणनीति को पुलिस मुख्यालय ने विशेष रूप से सराहा। वर्तमान में वे बीएसएफ में डीआईजी पद पर कार्यरत हैं।
धौलपुर पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान भी तीसरी बार डीजीपी डिस्क पाने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। बीहड़ों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों वाले जिले में अवैध बजरी परिवहन पर नियंत्रण, अपराधों में कमी और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों को इस सम्मान का आधार माना गया है।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, चयन प्रक्रिया में अपराध नियंत्रण, साइबर अपराधों की रोकथाम, कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा, नवाचार आधारित पुलिसिंग और उत्कृष्ट सेवा जैसे मानकों को प्रमुखता दी गई। सम्मानित होने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को जल्द ही औपचारिक समारोह में डीजीपी डिस्क और प्रशस्ति रोल प्रदान किए जाएंगे।
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