भरतपुर में डॉ. मोहकम सिंह की पुस्तक ‘आशियाना ढूंढता हूं’ के विमोचन पर साहित्यकारों ने ग़ज़लों की सराहना की और ब्रजभाषा संरक्षण पर गंभीर चर्चा की। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार शामिल हुए।
‘नई हवा’ की खबरों से जुड़ने के लिए हमारे WhatsApp Channel को follow करें ।
भरतपुर
साहित्य और ग़ज़लों की सरज़मीं भरतपुर एक बार फिर साहित्यिक चर्चा के केंद्र में आ गई, जब राजस्थान जन सांस्कृतिक परिषद, बृजवानी जन सेवा समिति, बृज नगर और राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. मोहकम सिंह सहजी की पुस्तक ‘आशियाना ढूंढता हूं’ का विमोचनहुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने न सिर्फ पुस्तक की समीक्षा की, बल्कि ब्रजभाषा के संरक्षण को लेकर गंभीर विमर्श भी सामने रखा।
वरिष्ठ साहित्यकार वेद प्रकाश शर्मा ‘वेद’ ने पुस्तक पर विचार रखते हुए कहा कि डॉ. मोहकम सिंह ने ग़ज़लों के माध्यम से जीवन की गहरी अनुभूतियों को बेहद सटीक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार इस कृति में वर्तमान परिवेश, युगीन परिस्थितियाँ, व्यवस्था की विसंगतियाँ और जीवन की समस्याएँ गहराई से उभरकर सामने आती हैं।
ग़ज़लकार महेंद्र मोहनिबी ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इन ग़ज़लों में दार्शनिकता के साथ-साथ सामाजिक यथार्थ को बहुत ही कम शब्दों में अभिव्यक्त किया गया है, जो इसे खास बनाता है।
प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने इसे एक श्रेष्ठ ग़ज़ल संग्रह बताते हुए कहा कि इसमें मानव जीवन की पीड़ा, संघर्ष, सामाजिक विसंगतियाँ, नैतिकता और दर्शन को मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया गया है।
कवि श्याम सिंह ‘मधुर’ ने कहा कि इस पुस्तक में उच्च कोटि की काव्य संपदा का सुंदर उद्घाटन हुआ है, जो साहित्य प्रेमियों को लंबे समय तक प्रभावित करेगा। वहीं वरिष्ठ कवि राजेंद्र अनुरागी, हरिश्चंद्र ‘हरि’ और लोकेश सिंघल ने भी इसे अत्यंत प्रभावशाली ग़ज़ल संग्रह बताया, जिसमें कम शब्दों में गहरे भावों की अभिव्यक्ति की गई है।
डॉ. मोहकम सिंह ‘सहजी’ ने अपनी पुस्तक के बारे में बताया कि इसमें विभिन्न विषयों पर ग़ज़लों के माध्यम से सरल भाषा में भावनाओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के अंत में ग़ज़ल विधा की सामान्य जानकारी भी दी गई है, जिससे पाठकों को समझने में आसानी होगी।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों ने ब्रजभाषा की स्थिति पर भी गंभीर चर्चा की। सभी ने एक स्वर में कहा कि ब्रजभाषा के कवियों की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए और इसके संरक्षण के लिए ब्रजभाषा अकादमी का मुख्यालय जयपुर से स्थानांतरित कर भरतपुर में स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही नियमित काव्य गोष्ठी, कवि सम्मेलन, शोध पत्र वाचन और साहित्यिक चर्चाओं के आयोजन पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार वेद प्रकाश ‘वेद’, ग़ज़लकार महेंद्र मोहनिबी, ललित तारा, प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार गुप्ता, हरिश्चंद्र ‘हरि’, अभिषेक ‘अमर’, राजेंद्र अनुरागी, श्याम सिंह ‘मधुर’, लोकेश सिंघल, पूरन शर्मा, प्रवेश अकेला, संजय एडवोकेट और डॉ. मोहकम सिंह ‘सहजी’ सहित अनेक साहित्यकार एवं कवि उपस्थित रहे।
नई हवा खबरें अपने मोबाइल पर नियमित और डायरेक्ट प्राप्त करने के लिए व्हाट्सएप नंबर 9460426838 सेव करें और ‘Hi’ और अपना नाम, स्टेट और सिटी लिखकर मैसेज करें। आप अपनी खबर या रचना भी इस नंबर पर भेज सकते हैं।
30 की उम्र में ही हड्डियां हो रहीं खोखली | ये आदतें चुपचाप शरीर को बना रही हैं ‘फ्रैक्चर मशीन’
‘नई हवा’ की खबरों से जुड़ने के लिए हमारे WhatsApp Channel को follow करें ।
