कोटा ACB कोर्ट (Kota ACB court) ने 14 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन सरकारी वकील को 3 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
कोटा / भरतपुर
न्याय दिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले एक चेहरे पर जब भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो, तो पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है ACB कोर्ट कोटा से, जहां 14 साल पुराने रिश्वत प्रकरण में तत्कालीन सरकारी वकील हरि सिंह को 3 साल की जेल और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
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मामला महिला थाने में दर्ज दहेज केस से जुड़ा है, जिसमें आरोप था कि केस से नाम निकलवाने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी। ग्राम अतरामपुरा, पोस्ट चटोली तहसील वैर, जिला भरतपुर निवासी आरोपी हरि सिंह पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस के नाम पर काम कराने और केस से नाम हटवाने के एवज में 5 हजार रुपये की मांग की थी।
परिवादी ओम प्रकाश वैष्णव ने 16 नवंबर 2011 को एसीबी कोटा चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार उनकी भाभी द्वारा दर्ज दहेज मामले में उनके परिवार को गलत तरीके से फंसाया गया था। इस केस में पहले ही पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन इसी दौरान रिश्वत मांगने के आरोप सामने आए।
आरोपों के मुताबिक, सरकारी वकील हरि सिंह ने फोन कर यह कहा कि वह थानेदार से बात कर केस से नाम हटवा सकते हैं और इसके लिए पैसे की जरूरत होगी। इसके बाद मामले की शिकायत एसीबी तक पहुंची।
एसीबी ने जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद ट्रैप की योजना बनाई, हालांकि अंतिम चरण में आरोपी द्वारा पैसे न लेने के कारण ट्रैप सफल नहीं हो सका। इसके बावजूद जांच जारी रही और बाद में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की गई।
जांच में 19 गवाह और 30 से अधिक दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने हरि सिंह को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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