डॉ. अलका अग्रवाल की कविता ‘आज की सीता’ आधुनिक नारी की पीड़ा, सामाजिक लांछन, अग्नि परीक्षा और सम्मान के लिए उसके संघर्ष को मार्मिक शब्दों में सामने रखती है।
डॉ. अलका अग्रवाल की कविता ‘आज की सीता’ आधुनिक नारी की पीड़ा, सामाजिक लांछन, अग्नि परीक्षा और सम्मान के लिए उसके संघर्ष को मार्मिक शब्दों में सामने रखती है।