निर्मोही कौन?

पति की मृत्यु के बाद शोक में डूबी विभा को सांत्वना देने के बजाय एक कटाक्ष उसकी पीड़ा को और गहरा कर देता है। यह मार्मिक लघुकथा बताती है कि दुख की घड़ी में शब्द भी मरहम बन सकते हैं और घाव भी। अंत में कहानी पाठक से एक सवाल पूछती है—आखिर निर्मोही कौन है?