दौसा के मुर्शिद नगर में हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह साहब का 43वां उर्स संदलपोशी के साथ संपन्न हुआ। हजारों जायरीनों ने अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी।
दौसा (अजीमुद्दीन)। चार दिन तक अकीदत, कव्वाली और रूहानी महफिलों से गुलजार रही लालसोट बाईपास स्थित मुर्शिद नगर की दरगाह पर शुक्रवार को जायरीनों की भीड़ उमड़ पड़ी। मौका था हजरत ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह साहब के 43वें उर्स के समापन का। संदलपोशी की रस्म के साथ उर्स संपन्न हुआ। इस दौरान हजारों जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआ मांगी।
उर्स के समापन पर संदल शरीफ का जुलूस सूफी बाबू जलालुद्दीन शाह हकीमी और सूफी नवाजुद्दीन शाह हकीमी के घर से रवाना हुआ। जुलूस शेखान मोहल्ले स्थित महफिल खाने पहुंचा, जहां कव्वाली का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद संदल शरीफ का जुलूस दरगाह शरीफ पहुंचा। दरगाह के सज्जादानशीन सूफी इकबाल अहमद शाह साहब की मौजूदगी में संदलपोशी की रस्म अदा की गई।
रस्म पूरी होने के बाद सजी महफिले रंग में फनकारों ने ख्वाजा सूफी हकीमुद्दीन शाह साहब की शान में एक से बढ़कर एक कलाम पेश किए। सूफियाना कलाम से माहौल अकीदत में डूबा रहा। महफिल के बाद दुआ की गई, जिसमें बड़ी संख्या में जायरीन शामिल हुए। लोगों ने ख्वाजा हकीम की चौखट पर अकीदत का नजराना पेश कर देश में शांति, खुशहाली और आपसी भाईचारे की कामना की।
चार दिन तक बाजार में भी रही रौनक
उर्स के दौरान दरगाह परिसर में लगी दुकानों पर भी अच्छी खासी चहल-पहल रही। जायरीनों ने चादर, फूल-माला, अगरबत्ती और सौंदर्य प्रसाधन की दुकानों से खरीदारी की। बच्चों के खिलौने और गुब्बारे बेचने वालों के यहां भी भीड़ नजर आई। वहीं, झूले-चकरी का आनंद लेने के साथ लोगों ने चाट-पकौड़ी, चाय और पान की दुकानों पर भी समय बिताया।
भाईचारे की मिसाल बना उर्स
43वां उर्स परंपरागत तरीके से संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाजिरी लगाई और अगले साल फिर उर्स में शामिल होने की दुआ के साथ विदाई ली।
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