कहानी, कविता और कल्पनाओं की उड़ान | दौसा में बच्चों ने सीखा ‘शब्दों से दुनिया गढ़ने’ का हुनर

दौसा में आयोजित बाल साहित्य रचना शिविर में बच्चों ने कहानी, कविता और कल्पनाओं के जरिए शब्दों से नई दुनिया गढ़ने की कला सीखी। रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को मिला नया मंच।

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दौसा 

दौसा में मंगलवार का दिन बच्चों की कल्पनाओं, कहानियों और रचनात्मक ऊर्जा के नाम रहा। गुप्तेश्वर रोड स्थित महात्मा गांधी विद्यालय में जब छोटे-छोटे बच्चों ने कविता, कहानी और चित्रकथा की दुनिया में कदम रखा, तो पूरा परिसर साहित्यिक उत्साह से भर उठा।

अनुराग सेवा संस्थान द्वारा ‘अनुवाद 31’ के अंतर्गत आयोजित बाल साहित्य रचना शिविर का शुभारंभ बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. अंजीव अंजुम और प्राध्यापक गरिमा शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया।

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शिविर में बच्चों को सिर्फ किताबों की बातें नहीं बताई गईं, बल्कि उन्हें यह समझाया गया कि शब्दों के जरिए अपनी कल्पनाओं को कैसे जिंदा किया जाता है। मुख्य वक्ता डॉ. अंजीव अंजुम ने कहानी लेखन, कविता लेखन, आलेखन और बाल चित्रकथा लेखन की बारीकियों को बेहद सरल और रोचक अंदाज में समझाया।

उन्होंने कहा कि बाल साहित्य बच्चों के मनोरंजन भर का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी सोच, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति को मजबूत करने का प्रभावी जरिया है। उनके संवादों के दौरान बच्चे लगातार सवाल पूछते रहे और अपनी कल्पनाओं को खुलकर साझा करते नजर आए।

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प्राध्यापक गरिमा शर्मा ने शिविर के उद्देश्य और गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लेखन में कल्पनाशीलता, सरल भाषा और मौलिकता सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने आधुनिक दौर में वीडियो और दृश्य माध्यमों की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य और विजुअल माध्यमों का मेल बच्चों की सीखने की क्षमता को और प्रभावशाली बनाता है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने कविता, कहानी और चित्रकथा लेखन को लेकर अपनी जिज्ञासाएँ रखीं। कई विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक रुचियों और लिखी गई छोटी-छोटी रचनाओं को भी साझा किया, जिससे पूरा माहौल साहित्यिक रंग में रंग गया।

इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. संजीव रावत, अनुदेशक नरेश शर्मा, विष्णु शर्मा, दिनेश कुमार महावर, शिखा तथा ओजस क्लासेस दौसा के उत्कर्ष नारायण सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

समापन अवसर पर आयोजक बृज मोहन कानपुरा ने कहा कि ऐसे साहित्यिक शिविर बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ उनमें साहित्य के प्रति रुचि और आत्मविश्वास पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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