कुलगुरु की नियुक्ति पर उठे सवाल | राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को भेजा नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने राजुवास (RAJUVAS) के कुलगुरु की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, वीसी और सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जयपुर 

राजस्थान की अकादमिक दुनिया में हलचल मचाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान के राज्यपाल और राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेनरी एंड एनिमल साइंस (राजुवास) के कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह नोटिस जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने डॉ. आर.के. बाघेरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया।

मामला यूनिवर्सिटी के कुलगुरु (वाइस चांसलर) की नियुक्ति से जुड़ा है, जिसे याचिका में नियमों के खिलाफ बताया गया है। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम पर राज्यपाल, कुलगुरु, रजिस्ट्रार और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

नियुक्ति पर सीधी चुनौती: नियमों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने 4 सितंबर 2025 को डॉ. संमत व्यास को राजुवास का कुलगुरु नियुक्त किया था। लेकिन यह नियुक्ति तय नियमों और प्रक्रिया के अनुरूप नहीं की गई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश यादव ने अदालत को बताया कि वीसी चयन के लिए 3 मई 2025 को सर्च कमेटी गठित कर विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन इस कमेटी के गठन में ही गंभीर नियमों का उल्लंघन हुआ।

सर्च कमेटी के चेयरमैन की नियुक्ति पर सवाल

याचिका में सबसे बड़ा आरोप सर्च कमेटी के चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर लगाया गया है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यूजीसी नियमों के अनुसार सर्च कमेटी का चेयरमैन उस यूनिवर्सिटी से संबंधित नहीं होना चाहिए।

इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर त्रिभुवन शर्मा को कमेटी का चेयरमैन बना दिया, जो उसी यूनिवर्सिटी के एनिमल न्यूट्रिशियन विभाग के एचओडी रह चुके हैं। इसे नियमों का सीधा उल्लंघन बताया गया।

कुलगुरु की योग्यता पर भी उठे गंभीर सवाल

याचिका में यह भी कहा गया कि कुलगुरु बनाए गए डॉ. संमत व्यास के पास आवश्यक 10 साल का टीचिंग अनुभव नहीं है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को पूरी तरह अवैध बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

अदालत का सख्त रुख: राज्यपाल और सरकार से जवाब तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यपाल, यूनिवर्सिटी प्रशासन और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस नोटिस के बाद अब यह मामला प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और संवैधानिक प्रक्रिया दोनों के लिए अहम बन गया है।

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