49 दिन बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) खोला, तेल और गैस कीमतों में भारी गिरावट। भारत को बड़ी राहत, पेट्रोल-डीजल और LPG कीमतों पर कम होगा दबाव।
तेहरान / नई दिल्ली
49 दिनों तक दुनिया की सांसें अटकी रहीं… और अब अचानक से राहत की ठंडी हवा चल पड़ी है। पश्चिम एशिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को आखिरकार ईरान ने खोल दिया है। इस फैसले के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई—और इस बार झटका नहीं, राहत वाला।
जहाज चले… और कीमतें फिसल गईं
जैसे ही Abbas Araghchi ने ऐलान किया कि युद्धविराम के बाकी दिनों में सभी कमर्शियल जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होगी, बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
- ब्रेंट क्रूड करीब 8.5% टूटकर 90.93 डॉलर प्रति बैरल
- WTI क्रूड करीब 9.4% गिरकर 85.82 डॉलर प्रति बैरल
- यूरोप में गैस कीमतें भी लगभग 8.5% लुढ़की
यानि 49 दिन का तनाव, कुछ घंटों में ही बाजार से पिघलता दिखा।
दुनिया की ‘ऑयल लाइफलाइन’ फिर चालू
Strait of Hormuz कोई आम रास्ता नहीं—दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई यहीं से गुजरती है। जब यह बंद होता है, तो असर सीधे पेट्रोल पंप से लेकर रसोई तक दिखता है।
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भारत के लिए क्यों बड़ी खबर?
भारत की ऊर्जा निर्भरता का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है—
- 40-50% कच्चा तेल (इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत से)
- 90% तक LPG आयात
- LNG सप्लाई का अहम हिस्सा
मार्च 2026 में जब यह रास्ता बाधित हुआ, तो भारत का कुल तेल आयात 15% तक गिर गया। हालात ऐसे बने कि देश को रूस की ओर झुकना पड़ा—जहां से आयात 90% तक उछलकर 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन के करीब पहुंच गया।
गैस सिलेंडर से लेकर पेट्रोल तक असर
होर्मुज बंद होने का सीधा असर आम आदमी तक पहुंचा—
- LPG की सप्लाई 90% से गिरकर 40% रह गई
- LNG बाधित हुई
- कई जगह कुकिंग गैस की किल्लत
अब रास्ता खुलते ही उम्मीद है कि सप्लाई सुधरेगी और कीमतों का दबाव कम होगा।
कितनी राहत मिलेगी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की गिरावट होती है, तो भारत का सालाना आयात बिल 1.5 से 2 अरब डॉलर तक कम हो सकता है।
यानी आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में राहत की गुंजाइश साफ दिख रही है।
ट्रंप का बयान, बाजार को और सहारा
इस बीच Donald Trump ने भी संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर जल्द समझौता हो सकता है। भले टाइमलाइन साफ न हो, लेकिन इतना संकेत ही बाजार के लिए काफी रहा—और गिरावट का सिलसिला तेज हो गया।
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