चार मुक्तकों में जिंदगी का आईना

चार प्रेरणादायक मुक्तक जो जिंदगी के संघर्ष, सच्चाई और हौसले को बेहद सरल और गहरे शब्दों में बयां करते हैं। पढ़ें दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता।

चार मुक्तक 

डॉ. अलका अग्रवाल, सेवानिवृत कॉलेज प्राचार्य, जयपुर  


कुछ होता है प्रतिकूल कभी,
मन में चुभता है शूल।
जब होता है अनुकूल नहीं,
क्या मिल सकता है कूल।1

ग़मों का काफिला आया था,
परेशां करने हमको।
मगर जब हम ना थके तो,
वही चला गया परेशां होकर।2

यह जिंदगी कुछ भी नहीं,
एक आईना है यह।
सूरत वही दिखेगी
जैसी भी असल में है।3

जो भी जहां है,
काम गर करता रहे अपना।
तो मुल्क हो जन्नत,
ना हो कोई भी परेशां।4
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