वैश्विक चुनौतियों पर मंथन का मंच | दिल्ली विश्वविद्यालय में ICSRD-2026 सम्मेलन में सतत विकास पर गूंजे विचार

दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में ICSRD-2026 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सतत विकास, लचीलापन और समावेशी विकास पर वैश्विक विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

नई दिल्ली 

दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में वाणिज्य विभाग ने 9-10 अप्रैल 2026 को “सतत विकास, लचीलापन और समावेशी विकास” विषय पर पहले अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (ICSRD-2026) का आयोजन किया। यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि विचारों का संगम था—जहां शिक्षाविद, नीति निर्माता और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ एक साथ आए और विकास की नई दिशा पर गंभीर चर्चा हुई।

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पहले दिन: नीतियों से लेकर शिक्षा तक गहन विमर्श

सम्मेलन के पहले दिन सुश्री आर. विमला (IAS), प्रो. आर. के. सिंह, प्रो. अमित कुमार सिंह, प्रो. श्वेता आनंद, प्रो. रुचि गुप्ता और प्रो. आर. एस. मीना ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को जोड़ते हुए श्री करीम इहाब सलाह ऑनलाइन जुड़े।

दूसरे दिन: वैश्विक भागीदारी और हाइब्रिड मॉडल की ताकत

दूसरे दिन प्रो. वी. के. श्रोत्रिया, डॉ. मनोरंजन शर्मा, सुश्री अनास्तासिया इल्युशिना, प्रो. अरविंद कुमार, प्रो. सुभाष चंद्र, डॉ. देवेश बिरवाल और डॉ. अंचल अरोरा ने विचार साझा किए, जबकि डॉ. सोरेन कील ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। यह हाइब्रिड प्रारूप सम्मेलन की व्यापकता और वैश्विक पहुंच का प्रमाण बना।

चार ट्रैक, एक लक्ष्य—सतत भविष्य

सम्मेलन को चार प्रमुख ट्रैक में विभाजित किया गया:

  • सतत वित्त, अर्थशास्त्र और पर्यावरण शासन
  • सतत विपणन, संचालन और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
  • सतत मानव संसाधन प्रबंधन और संगठनात्मक व्यवहार
  • सतत विकास, नवाचार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और सार्वजनिक नीति

इन सत्रों में ESG एकीकरण, नैतिक उपभोग, लचीली आपूर्ति श्रृंखला, समावेशी कार्यस्थल और नीति-आधारित विकास जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

विकास बनाम जिम्मेदारी—तीखा सवाल

चर्चाओं में सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और जल प्रबंधन जैसे विषयों को सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा गया। वक्ताओं ने मुनाफा-केंद्रित मॉडलों की आलोचना करते हुए कहा कि सामाजिक और पर्यावरणीय लागतों की अनदेखी अब स्वीकार्य नहीं है।

‘सस्टेनेबिलिटी एक सोच है, सिर्फ रणनीति नहीं’

वक्ताओं ने जोर दिया कि स्थिरता केवल नीतियों का हिस्सा नहीं, बल्कि एक नैतिक मानसिकता होनी चाहिए—जो भारतीय दर्शन से भी जुड़ी है। लचीलेपन को सिर्फ संकट से उबरना नहीं, बल्कि समावेशी और अनुकूल विकास के रूप में देखने की जरूरत बताई गई।

छात्रों की भागीदारी बनी ताकत

सम्मेलन में संकाय सदस्यों, शोधार्थियों और स्नातक/स्नातकोत्तर छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और अपने शोध प्रस्तुत किए। प्रधानाचार्य प्रो. राकेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में वाणिज्य संकाय ने इस आयोजन को न सिर्फ सफल बनाया, बल्कि इसे प्रभावशाली और सार्थक विमर्श का मंच भी बना दिया।

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