चेहरे …

यह लघु कहानी बताती है कि कैसे लोग प्रदूषण और ट्रैफिक पर चिंता जताते हैं, लेकिन अपने व्यवहार से उन्हीं समस्याओं को बढ़ावा भी देते हैं। समाज के दोहरे चेहरों पर तीखा व्यंग्य।

डरी हुई नन्ही…

एक मासूम बच्ची, आया की डरावनी कहानियों से इतना सहम गई कि अंधेरे में उसे चुड़ैल दिखाई देने लगी। पढ़ें “डरी हुई नन्ही” — बचपन के डर और माता-पिता के स्नेह को दर्शाती एक भावनात्मक लघु कथा।

सुख…

पानी के बुलबुले की भांति क्षणिक,
कांच की भांति भंगुर,
स्वयं की परछाई की भांति
हाथ ना आने वाला
होता है सुख।

सुसंस्कृत सौदा…

मंडप में अग्नि प्रज्वलित थी— साक्षी, शुद्ध, निर्विकार।
मंत्र गूँज रहे थे— “अटूट बंधन।”
किन्तु धीमी फुसफुसाहटों में एक ही

श्रीनाथद्वारा पाटोत्सव में चार साहित्यकार ‘ब्रजभाषा ग़ज़ल श्री’ सम्मान से विभूषित

श्रीनाथद्वारा में आयोजित पाटोत्सव में ब्रजभाषा ग़ज़ल को विशेष स्थान मिला। भरतपुर व दौसा के चार साहित्यकारों को ब्रजभाषा ग़ज़ल श्री सम्मान से नवाजा गया।

अतीत की भूल…

यह तो कोई बात नहीं है ,
एक भूल यदि कोई हो गई
उसको लेकर के ही सोचें
कैसे ,क्यों कर हुआ ये हमसे।

गाजर का हलवा…

रामवती सुबह 7:00 बजे जब अपने घर से काम करने के लिए निकली, तब कुछ दूरी पर भी कोहरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दे रहा था । सर्दी से वह कांप रही थी ,उसने अपने शॉल को और कस कर

संस्कृति हमारी पहचान, साहित्य हमारी शक्ति | जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मंच से सीएम भजनलाल शर्मा का बड़ा संदेश

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा—संस्कृति और साहित्य भारत की आत्मा हैं। उन्होंने विरासत संरक्षण, पुस्तकों के महत्व और साहित्य को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

कविता से कथा तक का सफ़र | जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में ‘इच्छा मृत्यु’ के साथ अंशु हर्ष का नया अध्याय

जयपुर लिट्रेचर फेस्टिवल में लेखिका अंशु हर्ष के पहले नॉवल ‘इच्छा मृत्यु’ का लोकार्पण। सत्र “पोएट्री – खुद से बात” में कविता से नॉवल तक की रचनात्मक यात्रा पर गहन संवाद।

ठंड…

सुबह से ही कड़ाके की ठंड थी। हाड़ कंपाने वाली बर्फीली हवाएं तीर की तरह चुभ रहीं थीं। ऊपर से कोहरा तो जैसे बर्फ के छोटे कणों के रूप में बरस रहा था। कांता बाई ने