सुसंस्कृत सौदा…

मंडप में अग्नि प्रज्वलित थी— साक्षी, शुद्ध, निर्विकार।
मंत्र गूँज रहे थे— “अटूट बंधन।”
किन्तु धीमी फुसफुसाहटों में एक ही