तू मेरी धरती मेरा आकाश है। मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
तेरी सांसों से जीवन को सांस मिली, तेरी उंगली से आंखों की राह खुली, तेरी दृष्टि में मेरा विन्यास है। मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
रातों की तू मीठी अनुपम निंदिया है, मेरे सपनों की पावन एक नदिया है, तेरी लोरी ही आनंद मिठास है। मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
हाथ पकड़कर तेरा, मैंने सुख पाया, तेरे आंचल ने हर दुख को झूठलाया, तेरा आशीर्वाद मेरा इतिहास है। मां तू मेरे जीवन का विश्वास है।
(लेखक प्रधानाध्यापक एवं राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी जयपुर की पत्रिका ब्रजशतदल के सहसंपादक हैं )
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